सोनू को आज स्कूल में इतवार की छुट्टी थी। उसके दोस्त बाहर गए हुए थे। उसके साथ खेलने वाला कोई नहीं था, तो वह बोर हो रही थी। अपनी बोरियत दूर करने के लिए उसने कुछ क्राफ्ट बनाने का सोचा। वह अपनी अलमारी में से कुछ सफेद कोरे कागज़ ले आई और टीवी में वीडियो देखकर उन सफेद कागज़ों से चिड़िया बनाने लगी। लेकिन उससे चिड़िया ठीक से नहीं बन पा रही थी। वह बार-बार एक के बाद एक कागज़ को फाड़ देती थी और नया कागज़ लेती थी। थोड़ी देर में उसकी माँ वहाँ आईं, और उनके बीच कुछ ऐसा संवाद हुआ:
माँ: अरे सोनू! यह तुम क्या कर रही हो? इतने सारे कागज़ क्यों बर्बाद कर रही हो, बेटा?
सोनू: देखो ना माँ, मैं कब से टीवी में देखकर चिड़िया बनाने की कोशिश कर रही हूँ, लेकिन मुझसे नहीं बन पा रही है।
माँ: हाँ, ठीक है सोनू, लेकिन तुमने कुछ ज़्यादा ही कागज़ का नुकसान कर दिया है।
सोनू: माँ, आप ही तो कहती हो कि हमें पढ़ाई के अलावा भी कुछ और एक्टिविटीज करनी चाहिए और कुछ नया सीखना चाहिए। माँ, अगर हम कुछ नया सीखते हैं और थोड़ा बहुत नुकसान हो जाता है, तो इसमें क्या हर्ज़ है?
माँ: बात सही है कि हमें कुछ नया सीखते रहना चाहिए और उसमें कभी-कभी थोड़ा नुकसान भी हो सकता है। लेकिन अगर हम थोड़ी समझदारी से काम लें, तो इस नुकसान को कम या बिल्कुल भी ना होने जैसा कर सकते हैं।
सोनू: वो कैसे माँ, बताइए ना।
माँ: देखो सोनू, तुम जानती हो कि तुम अभी चिड़िया बनाना सीख रही हो। तो तुम्हें शुरुआत में अच्छे वाले कागज़ न लेकर, कोई रफ कागज़, जिसका अब कोई काम न हो, या फिर पुराने न्यूजपेपर का इस्तेमाल करना चाहिए।
माँ: हाँ, और यह पेड़ हमारी प्रकृति का एक अहम हिस्सा है। पेड़ जितने कम हो जाते हैं, उतना ही इस प्रकृति के पर्यावरण को ज़्यादा नुकसान होता है। और दूसरी बात, क्या तुमने कभी कोई पेड़ लगाया है?
सोनू: नहीं माँ।
माँ: यही बात है सोनू। मानव पेड़ों से मिलने वाली चीज़ों का बिना सोचे-समझे अनहद इस्तेमाल करते हैं, लेकिन उन्हें बोना और उनका जतन करके बड़ा करना बहुत कम लोग करते हैं। इसलिए, अगर हम पेड़ उगा नहीं सकते, तो उन्हें काटकर उनसे मिलने वाली चीज़ों का इस्तेमाल भी नहीं करना चाहिए या बहुत सोच-समझकर करना चाहिए। पेड़ इस धरती के हर जीव के लिए किसी न किसी रूप में बेहद उपयोगी हैं। पेड़ और हर एक जीव इस प्रकृति का समान हिस्सा हैं, और इसीलिए हमें एक-दूसरे के पूरक बनकर जीना चाहिए। तभी हम इस धरती पर एक खुशहाल जीवन जी पाएँगे।
सोनू: माँ, आज मुझे पेड़ का महत्व कितना है, यह समझ में आया। आज के बाद मैं इस प्रकृति से जुड़ी हर एक वस्तु को नुकसान न हो, उसका ध्यान रखूँगी। और हाँ, मैं साल में 4 से 5 पेड़ अवश्य लगाऊँगी और उनका जतन करूँगी।
माँ: धन्यवाद, माँ