मानव जाति एक
कोई नही पराया जग में ,
हम सब मानव जाती हैं ।
उँच्च नीच का भेद नहीं,
हम एक धरा के वासी हैं।
रंग’ रूप ‘आकार’ प्रकार ,
यह प्रकृति की देन है।
जाति, पाति, वर्ग ,भेद ,
यह भ्रमित मानव की देन है।
अपना पराया दीवार तोड़कर,
सबको गले लगाना है।
सभी के साथ जीना बन जाए,
हमें ऐसा परंपरा बनाना है।
भौतिक वस्तु नियंत्रण कर मानव,
अपनी आवश्यकता को पहचानना
है।
समाधान- समृद्धि लक्ष्य पा कर,
सुखमय जिंदगी बिताना है।
जग में अज्ञानता, अभाव न हो,
ऐसे सुविचार लाना है।
सुख शांति की दरिया वहा करेंजग में,
हमें ऐसा स्वर्ग बनाना है।
उर्मिला सिदार “उर्मी” बुलाँकी रायगढ़ छत्तीसगढ़
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