संबंधो में न तकरार चाहिए,
रिश्तों में न दरार चाहिए,
समझदार हो सर्व मानव,
ऐसा कोई विकल्प चाहिए।
स्वयं के प्रति विश्वास चाहिए,
शिकायत मुक्त परिवार चाहिए,
अभाव मुक्त हो सभी परिवार,
ऐसा कोई विचार चाहिए।
सांप्रदायिक घेरे से अलग थलग
धन का नहीं कोई लेनादेन
सहअस्तित्व रुपी अस्तित्व ज्ञान, जीवन ज्ञान
मानवीयता पूर्ण आचरण ज्ञान
से बने समझदार हर मानव।
ऐसा कोई दिदावर गुरु चाहिए।
सुखी, समृद्ध हो संसार,
ऐसा कोई मार्ग चाहिए।
युद्ध से मुक्ति चाहिए,
मानव को अब विश्राम चाहिए।
सुख, समृद्धि, शांति चाहिए,
मानव को अब विश्राम चाहिए...
__ विनोद म्हात्रे
मध्यस्थ दर्शन सह-अस्तित्ववाद की रोशनी में
स्वयं स्फूर्त पंक्तियाँ। ☺🙏धन्यवाद🙏💕 आपके समझ बढा़ने के लिए सभीको!