मध्यस्थ दर्शन से दोस्ती।
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मिले न सुख तो मध्यस्थ दर्शन से दोस्ती कर ली।
इसी तरह से अग्रसर हमने जिंदगी कर ली।
मिले न सुख तो-----
अब आगे जो भी हो अंजाम देखा जाएगा।
सह अस्तित्व वाद तलाश लिया और बंदगी कर ली।
मिले न सुख तो --
अनुभव हुआ भी न था
और अनुमान कर लिया।
बाबाजी से मिला भी न था
और बात भी कर ली।
मिले न सुख तो--
वो जिनको प्यार है सुविधा से
इश्क संग्रह से।
वही कहेंगे कभी वही कहेंगे कभी
हमने तबाह जिंदगी कर ली।
मिले न सुख तो---
कवि - महेंद्र सिंह “अजनबी”
🙏🙏
मध्यस्थ दर्शन से दोस्ती।
Mahendra Singh ji