एक हसरत
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एक हसरत थी कि अस्तित्व का मुझे प्यार मिले 2
मैने मंजिल को तलाशा
मुझे मध्यस्थ दर्शन मिले।
जिंदगी और बता 2
तेरा इरादा क्या है।
एक हसरत थी कि--
मुझे पैदा किया दो ज्यानात्माओं ने 2
और बर्बाद किया परंपरा की मान्यताओं ने
मेरे दामन में बता
दुख क्लेश से ज्यादा क्या है।
एक हसरत थी----.
मैने आदर्श वाद के संग जी के ग्रंथ प्रमाण देखी।
भौतिकवाद में यंत्र प्रमाण देखी।
ऐसी दूनियाँ में मेरे वास्ते रक्खा क्या है।
एक हसरत--.
सह अस्तित्व वाद में रिश्तों की गरमाहट देखी।
मानव प्रयोजन समाधान समृद्धि अभय और सह अस्तित्व देखी।
जीवन लक्ष्य सुख शांति संतोष और आनंद देखी।
धरती के स्वर्ग होने की परिकल्पना देखी।
आदमी चाहे तो तकदीर बदल सकता है
पूरी दुनियाँ की तस्वीर बदल सकता है
आदमी सोंच तो ले उसका इरादा क्या है प्रयोजन क्या है।
एक हसरत थी-----
कवि- महेंद्र सिंह” अजनबी”
🙏🙏


Mahendra Singh ji

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