मध्यस्थ दर्शन: एक प्रेरणा स्रोत
मध्यस्थ दर्शन के विचार, सर्वतोमुखी समाधान का देते हमें आधार।
सह-अस्तित्व की प्यार भरी बातें, अखंड समाज, सार्वभौम व्यवस्था में जीने की प्रेरणा देते साक्षात।
बाबाजी के सानिध्य में, दिल के फूल खिलते थे अपार।
कभी अमरकंटक, कभी अछोटी, कभी सम्मेलन में मिलते थे हम यार।
पुरानी वो यादें, जागृति की प्रेरणा देतीं हमें बारंबार।
मध्यस्थ दर्शन के विचार...
ऐसा लगता है मुझे, धरती ही स्वर्ग हो जाए।
मानवीय आचरण संहिता अपना लें, सर्व मानव सहजता से, मध्यस्थ दर्शन की मेहरबानी से।
बाबाजी की यादों की बरसातें, हमें दिवा रात्रि प्रेरित करतीं अनवरत।
मध्यस्थ दर्शन के विचार...
वो बाबाजी का डाँटना, फिर स्नेह पूर्वक प्यार से समझाना।
बच्चों से भी पूरी तन्मयता से बातें करना, वो स्नेहिल संस्मरण।
हमें मानव चेतना में जीने की प्रेरणा देते, प्रेम पूर्वक अपार।
मध्यस्थ दर्शन के विचार...
अस्तित्व सह-अस्तित्व है, अस्तित्व में विकास क्रम विकास है।
जागृति क्रम जागृति है, अस्तित्व स्थिर है, जागृति निश्चित है।
बाबाजी के आश्वासन, हमें स्वयं स्फूर्त प्रेरणा देते, हर बार।
शब्द से अर्थ, अर्थ से वस्तु, वस्तु से जिंदगी के चल निकलने की बातें, हमें आश्वस्ति देतीं अपार।
मध्यस्थ दर्शन के विचार...
समय होने पर लिखा जाए, या जब अच्छे विचार मन में आएं तब लिखा जाए।
साधन भैया के संग, बाबाजी की प्रेरणास्पद बातें, हमें अध्ययन के लिए प्रेरित करतीं, निरंतर।
मध्यस्थ दर्शन के विचार...
प्रतीक प्राप्ति नहीं होती, उपमा उपलब्धि नहीं होती।
वस्तु ही प्राप्ति होती है, ऐसी गूढ़ ज्ञान की बातें, हमें ध्यानाकर्षण करातीं, बारंबार।
मध्यस्थ दर्शन के विचार...
यह कविता मध्यस्थ दर्शन के विचारों और बाबाजी के प्रभाव का सुंदर वर्णन करती है। यह हमें सह-अस्तित्व, मानवीय मूल्यों, और जागृति के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है।
Mahendra Singh ji
एक प्रेरणा स्रोत
Mahendra Kumar Singh ji