यह कविता परिवार, व्यवस्था, और सह-अस्तित्व के महत्वपूर्ण विषयों पर प्रकाश डालती है।
कविता का विश्लेषण:
* परिवार में व्यवस्था: कविता की शुरुआत में ही कहा गया है कि परिवार में हम सब व्यवस्था में जीते हैं। यह व्यवस्था हर समय, हर क्षण और हर दिन एक-दूसरे के पूरक के रूप में होती है। माता-पिता इस व्यवस्था को समझने और समझाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
* सह-अस्तित्व: कविता में सह-अस्तित्व के महत्व पर जोर दिया गया है। माता-पिता बच्चों को यह समझाते हैं कि परिवार में हर संबंध सह-अस्तित्व पर आधारित है। यह सह-अस्तित्व ही संबंधों का प्रयोजन है।
* नियमों का पालन: कविता में कहा गया है कि संबंधों में जीने के लिए कुछ नियमों का पालन करना आवश्यक है। यह नियम ही परिवार को नियंत्रित और संतुलित रखते हैं।
* मानवीय मूल्य: न्याय, धर्म और सत्य को मानव के जीने की विधि बताया गया है। विवेक को समाधान और विज्ञान को समृद्धि का मार्ग बताया गया है।
* परिवार की भूमिका: परिवार को समाज की इकाई के रूप में देखा गया है। समाधान और समृद्धि से परिपूर्ण परिवार ही सामाजिक व्यवस्था को बनाए रखने में सक्षम होता है।
* ज्ञान का प्रमाण: अखंड सामाजिकता को ज्ञान का प्रमाण बताया गया है। सार्वभौम शुभ में ही व्यवस्था नित्य रूप से विद्यमान रहती है।
मेरे विचार:
यह कविता परिवार के महत्व को बहुत ही सुंदर ढंग से प्रस्तुत करती है। यह कविता हमें सिखाती है कि परिवार में व्यवस्था, सह-अस्तित्व और नियमों का पालन कितना जरूरी है। माता-पिता, बच्चों को इन मूल्यों को समझाकर एक बेहतर समाज का निर्माण कर सकते हैं।
यह कविता हमें यह भी याद दिलाती है कि न्याय, धर्म, सत्य, विवेक और विज्ञान जैसे मानवीय मूल्यों को अपनाकर ही हम एक समृद्ध और खुशहाल जीवन जी सकते हैं। परिवार समाज की सबसे छोटी इकाई है और अगर परिवार व्यवस्थित होगा तो समाज भी व्यवस्थित होगा।
Review: परिवार में हम सब व्यवस्था पूर्वक जीते हैं
Vinod Madhukar Mhatre ji