मैं हूं एक जाग्रत नारी
अब नहीं हूं अबला बेचारी।🌹🌹🌹

संबंध में जीती थी
प्रयोजन को पहचानी हूं ।🌹🌹🌹

परिवार व्यवस्था के अर्थ को
अब जानी मानी हूँ।🌹🌹🌹

प्रथम गुरु का संबोधन
अब मैं सार्थक कर पाऊँगी ।🌹🌹🌹

मानव मानसिकता से जीकर
नर -नारी से मुक्त हो जाउँगी।🌹🌹🌹

मानव रूप में स्वयं को पहचानूंगी
संतानों को मानवता समझाऊँगी।🌹🌹🌹

यह धरती स्वर्ग बनेगी
मानव देवता कहलाएंगे ।🌹🌹🌹

भ्रमित मानव के कार्यकलाप
भ्रम से मुक्त हो जाएंगे ।🌹🌹🌹

जागृति पूर्वक प्रयोजन पूर्वक
व्यवस्था में परिवार मानव।🌹🌹🌹

व्यवस्था की एक इकाई के रूप में
समग्र व्यवस्था में भागीदारी कर पाएंगे।🌹🌹🌹

समाधान समृद्धि पूर्वक समाज मानव होकर
देव पद को पाएंगे ,देव पद में प्रमाणित
होकर पद मुक्त हो जाएंगे।🌹🌹🌹🌹🌹

     *लेखिका सुनीता पाठक*

Sunita Pathak ji

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