• सत्यमेव जयते के उद्घोष के प्रमाणित होने के संभावना के उदय काल की आप सभी को शुभकामनाएं।*

  • सत्य का उदय अभी नहीं हुआ है लेकिन सत्य के उदय की संभावनाएं उदय हुई है जब तक मानव जाति में सत्य का निर्णय सार्वभौमिक स्वरूप में नहीं हो जाता तब तक इस प्रकार की घटनाओं को सद्प्रवृत्तियों के उदय काल के रूप में ही देखा जाना चाहिए*


राम मंदिर का निर्माण केवल हिंदुओं की आस्था का प्रमाण नहीं है हिंदुओं की सहिष्णुता ,सदाशयता, उदारता का ही प्रमाण नहीं है बल्कि पूरी मानव जाति में सत्य पूर्वक उदारता, विशालता पूर्वक जीने की आदिकालीन मनोकामनाएं हैं उनके उदय के काल के रूप में देखा जाना चाहिए ।

राम के चरित्र के माध्यम से पद ,धन जैसी विभूतियों से बड़ी वस्तु वचनबद्धता है चरित्र और नैतिकता का निर्वाह है इस बात का प्रमाण है राम का और रामायण के चरित्रों का प्रमाण।

जो भी नकारात्मक चरित्र है वह भी इस बात का प्रमाण है किस नकारात्मकता कितनी भी प्रबल हो जाए सकारात्मक से प्रबल नहीं है।

रावण के चरित्र में पशुता में भी संवेदनाओं के अनियंत्रण में भी मर्यादा निर्वाह के सूत्र दिखाई देते हैं।

जटायु का चरित्र जो है गलती के प्रति छोटी सी भूमिका के निर्वाह को भी प्रसवित करती है यह इस बात को प्रदर्शित करती है; कि किसी भी विपरीत समय में भी सार्थक भूमिका का निर्वाह किया जा सकता है और इतिहास में सार्थक भागीदारी को प्रमाणित किया जा सकता है।

  • समस्त स्त्री चरित्र परिवार परंपरा व समाज परंपरा के अर्थ में संवेदनाओं के नियंत्रण के साथ संबंधों की मर्यादाओं के निर्वाह का प्रमाण है धैर्य और नियति में सत्य का प्रकाशन भी समय के साथ होता है इसकी प्रतिक्षा का प्रमाण भी दूरदर्शिता का भी।*

  • नियति पर विश्वास करने का आधार बनता है आज की घटना।की दुष्प्रवृत्तियां कभी भी इतनी प्रभावशील नहीं हो सकती कि वह सत्य को आच्छादित कर दें।*


यह संतुलन प्रकृति में बना ही रहता है

यह सतप्रवृत्तियों के उदय का काल है।

वसुधा कुटुंब और राम राज्य की कल्पनाएं मानव परंपरा को देने के अर्थ में मनोकामनाओं को सदिच्छाओं को बनाए रखने के अर्थ में ऐसी प्राण प्रतिष्ठाओं की सार्थकता है।

  • इसको केवल हिंदुओं के कार्यक्रम के रूप में देखने से संकीर्णता में देखना होगा*।


यह पूरी मानव जाति में अंतर्निहित सद्प्रवृत्तियों से जीने की जो इच्छाएं हैं कल्पनाएं हैं कामनाएं हैं उनके उदय के कल के रूप में देखा जाना चाहिए।

*हर धर्म संप्रदाय में जो भी मानव संतानों में सद् प्रवृत्तियों के साथ जीने के लिए प्रेरित है उन सभी के मनोबल के उदय का कल आज का शुभ दिन है*

Sunita Pathak ji

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