किसी भी राष्ट्र का उन्नयन उस राष्ट्र की अपने मौलिक विचारधारा से होती है। जिसका प्रणयन उस राष्ट्र के पूर्वज कर गए होते हैं। वसुधैव कुटुंबकम का उद्घोष जिस धरती से निस्रत हुआ वह धरती निश्चित ही वैचारिक समृद्धि की भूमि रही होगी ।कालांतर से बाह्य प्रभावों से व अस्तित्व के प्रति अस्पटता से ,हम अपनी मौलिकता को पहचान नहीं पाए। समृद्धि एक भाव है जो मानव मानसिकता का फल है, जिसे बौद्धिक नियमों के रूप में जाना जाता है। जिन्हेअसंग्रह,स्नेह विद्या, सरलता व अभयता के रूप में भारत भूमि में पूर्व में भी शब्द रूप में पहचाना गयाथा। अर्थ रूप में व्यवस्था रूप में यह नियम प्रमाणित नहीं हुये। स्वतंत्रता का अस्तित्व है क्योंकि मध्यस्थ क्रिया का अस्तित्व है मानव मानसिकता ही स्वतंत्रता है आओ स्वतंत्रता को सही अर्थों में समझें🤔🤔 शासन मानसिकता स्वतंत्रता की अभिव्यक्ति नहीं होती, मानव ने स्वतंत्रता के लिए बहुत प्रयास किए जैसा भी उसको समझ में आया हमारे पूर्वजों ने जो स्वतंत्रता शब्द को हम तक पहुंचाया उसके लिए उनके प्रति कृतज्ञता🙇🙇🙇 जो भी कुछ हमारे पूर्वजों ने हम तक पहुंचाया है, हम उसे अपने प्रयासों से सही अर्थों को मानव परंपरा में लाकर के आने वाली संतानों के प्रति अपने कर्तव्य दायित्व का निर्वाह कर स्वतंत्रता की सही परिभाषा अपने बच्चों तक पहुंचाएंगे व मानव मानसिकता व न्याय पूर्ण व्यवहार की निरंतरता ही स्वतंत्रता है यह उनको समझाएंगे मानव जाति के उज्जवल भविष्य की शुभकामनाएं। स्वतंत्रता दिवस को व्यवस्था तंत्र में पहचान सकें व परंपरा बना सके इन्हीं शुभकामनाओं के साथ सभी को प्रतीकात्मक गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं🙏🏻🌹🙏🏻🌹🙏🏻🌹
राष्ट्र
Sunita Pathak ji