किसी भी बालक को
सर्वप्रथम शिक्षा माता-पिता से,
द्वितीय शिक्षा परिवार से,
तृतीय शिक्षा शिक्षा-संस्थान से,
चतुर्थ शिक्षा समाज से,
पंचम शिक्षा भौगोलिक (शित-उष्ण-वर्षा मान) परिस्थितियों से है।
इस तरह से देखें तो हम सभी शिक्षक हैं... कभी माता-पिता के रूप में, कभी परिवार के रूप में, कभी शिक्षक के रूप में तो कभी समाज के रूप में।
हम सब अपनी जिम्मेदारी, अपने दायित्व-कर्तव्य को समझ पाए और स्वयं, परिवार तथा समाज के लिए - चेतनाविकास-मूल्यशिक्षा, भावनात्मक-शिक्षा, कौशल-शिक्षा को उपलब्ध करा पाए यही ‘शिक्षक-दिन’ का महत्व है।
- हम सभी को शिक्षक दिन की हार्दिक शुभकामनाएं।*
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