कविता - “हे मानव !!!”
हे मानव........!!!
तू माटी का पुतला ....
...हाँ....
...हाँ...तू माटी का पुतला........ ।
समझ ले तू...,
तू माटी से बना....,
बढ़ता जाए जैसे पेड़ का तना.....!
...पर...
...पर....फल न आया वैसा.....
जिसके ..लिए तू है बना....!!!
हे मानव..............!!!
तू सिर्फ़ .... माटी .... तो नहीं.....!!!
जीना क्या है........
जीना.....क्या है....??
क्या तुझको है ...पता.....???
बावरे!
बावरे!!!
पहचान रे ख़ुद को....!!
पशुवत् .... कभी जीता था तू...!!!
कभी गुफा में, ...कभी पेड़ पर.....
कैसे पहुँचा....चाँद पे.. रे.. तू...!
जबकि.....
पशु आज भी ..., वैसा जीता !!!
पशु आज भी ..., वैसा जीता....,
ऐसा क्या है..?
ऐसा क्या है....??
जो... है.... बदला ...तू !!!
दाना -पानी पाते दोनों.... ही
चाहे पक्षी..चाहे हों पशु......!
पर रे मानव..............!
ऐसा क्या है....???
पर.. रे मानव....ऐसा....क्या... है..???
जो....तू ढूँढे , .... पाए न... तू !!!
सोचत... सोचत...... बीते ..उमरिया...,
पर .....सोचना क्या है .... , जाने न तू !
कुछ तो होगा.......!!
हाँ.... कुछ तो होगा.......
जो तू आया.....!!
अपना ..पता .. कब पाएगा तू......??
हे मानव!!!
हे मानव !!!
फिर वापस जाना...
वापस फिर माटी... बन जाना.....!!
जीवन क्या है ...? ये भी.. ना जाना...
तन नश्वर है... जीवन अमर है......
इसे यूँ ही .. क्या ...फिर...गंवाएगा तू ??
करना क्या है...? ....क्यों करना है...?
ये उत्तर जब पाएगा तू......... ,
तब....
तब ...तू समझ.......... कि
तू मानव है...
तब पूरक बन जाएगा तू.......
हे मानव!!!
तू सर्वश्रेष्ठ इकाई
अपना होना.... जाने...
तो उपयोगी हो पाएगा तू.....!!
उपयोगी हो जाएगा ......
तब.. ही
मानवत्व को पाएगा तू !!!
मानवत्व को पाएगा तू !!!
हे मानव!!!
सर्व शुभ को पाए तो ही
तृप्त हो पाएगा तू
सर्व शुभ को पाएगा तू
सर्व शुभ को पाएगा तू!!!
Written by
SEEMA YADAV
Teacher in Delhi
Residence in Faridabad (HARYANA)